Rabindranath Tagore Essay In Hindi | रबीन्द्रनाथ टैगोर पर निबंध

Rabindranath Tagore essay in Hindi प्रबंध पर आप का स्वागत है। ये essay बिलकुल  kids, class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, और class 10, कॉलेज के स्टूडेंट सभी के लिए हमने प्रस्तुत किया। 

साथ ही साथ आपको अलग अलग हेडिंग में Rabindranath Tagore essay in Hindi 100 words, 150 words, 200 words, 300 वर्ड्स। और long essay यानी की 400 words का भी हमने बना कर दिया है। कृपया शेयर करना ना भूले।

Essay Name Rabindranath Tagore
Birthday 7 May, 1861
Death date 7 August, 1941
Father’s Name Debendranath Tagore

Rabindranath Tagore essay in Hindi (100 words)

रबीन्द्रनाथ टैगोर भारतीय साहित्यकारों में से सबसे अलग और महान लेखक थे। उनका जन्म हुआ था 7th मई , १८६१ साल में। उनके पिता का नाम देबेन्द्रनाथ टैगोर और माता का नाम शारदा देवी है।
रबीन्द्रनाथ टैगोर घर की नौकरो के पास बड़ा हुआ, क्युकी उनकी माता का बचपन में ही देहांत हो गया था।
स्कूल छोड़ा हुआ एक बच्चा काफी कम उम्र से ही कविताये लिखना शुरू कर दिया था। बचपन में ही उनके लेखों में से कुछ कुछ पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुआ।
उन्होंने बंगाल के शांतिनिकेतन में विद्यालय स्थापित किया। १९१३ में उनको “गीतांजलि” काव्य ग्रंथ के लिये नोबेल पुरस्कार मिला। 

Rabindranath Tagore essay in Hindi (150 words)

 भारतीय साहित्य में रवीन्द्रनाथ टैगोर एक महान कवि, चित्रकार, दार्शनिक, सामाजिक मानवतावाद के प्रेरक थे। १८६१ साल के ७थ मई में उनका जन्म कोलकाता के जोरासांको टैगोर परिवार में हुआ।
उनके पिता एक राढ़ी ब्राम्हण थे जिनका नाम था देबेन्द्रनाथ टैगोर। बचपन में ही माता सारदा देवी का देहांत हो गया।
पिता ने उनको शिक्षा ग्रहण करने के लिए इंग्लैंड भेजा। पर रबीन्द्रनाथ वहां का पारम्परिक शिक्षा में संतुष्ट नहीं रहे, और इसलिए वापस भारत लौटे।
बहुत छोटे उम्र में से उन्होंने किताबें लिखना शुरू कर दी थी , और उनमे से कुछ पत्रिकाओं में भी आया। इंग्लैंड से लौटने के बाद वो शांतिनिकेतन में अपना खुद का स्कूल खोला। अभी उसका नाम विश्व-भारती है।
१९१३ में उनको उस साल की साहित्य में नावेल प्राइज मिला था, “गीतांजलि“ काव्यग्रंथ लिखने के लिए। उन्होंने अंग्रेज़ो की दी हुयी नाईट उपाधि वापस कर दिया।
हमें गर्व है की हम रबीन्द्रनाथ की भारत में रहते है। 

Essay On Rabindranath Tagore in (200-250 words)

१८६१ की ७थ मई में कोलकाता के जोरासांको ठाकुर परिवार में जन्म हुआ भारत की सबसे महान कवियों में से एक रबीन्द्रनाथ टैगोर का। रबीन्द्रनाथ टैगोर एक बंगाली कवि, गीतकार,नाटककार, प्रबंधक, और संछिप्त गल्पो के लेखक थे। 

रबिंद्रनाथ टैगोर ही प्रथम भारतीय कवि थे उन्होंने उस समय के प्रचलित संस्कृत कविताओं को अलविदा कहा। वो मनुष्य के बोलचाल वाले शब्दों को ही अपनी कविताओं में व्यवहार करता था। 

 पिता देबेन्द्रनाथ टैगोर की बहुत इच्छा थी रवि साहब को बैरिस्टर बनाने की। पर बहुत छोटे उम्र से ही साहित्य में रवीन्द्रनाथ ने ऐसी कविता लिखना शुरू कर दिया, जो पत्रिकाओं में भी आने लगा था। 

फिर उसको पढ़ने के लिए इंग्लैंड भेज दिया गया। पर इंग्लैंड की प्रचलित संस्कृति उनको पसंद नहीं आया और वो वापस भारत लौटे। 

भारत लौटने के बाद उन्होंने बीरभूम जिले की बोलपुर में एक विद्यालय की स्थापना की। जिसका नाम दिया गे विश्व-भारती।

१८९१ साल में उनको १० साल के लिए शिलाईदहा (अभी के बांग्लादेश में ) भेज दिया गया परिवार का संपत्ति देखभाल करने के लिए। 

ज्यादा तर समय वो वहा का पद्मा नदी के किनारे एक कुटीर में बैठे रहते थे। उनका गांव के प्रति प्रेम उनके कलम द्वारा लिखा गया हर एक लाइन में झलकता है। 

उस समय में उन्होंने “Sonar Tari” और “Chitrangada” इस तरह की जनप्रिय लिखनी उपहार दिया हम सबको। 

१९१३ में उनको “गीतांजलि” काव्य ग्रन्थ के लिए नोबेल पुरस्कार मिला। जलिआंवालाबाग़  घटना पर अपनी दुःख और अंग्रेज़ो पर गुस्सा होकर उन्होंने ‘नाईट‘ उपाधि को वापस दे दिया था। 

Long Essay On Rabindranath Tagore in Hindi (400 Words)

सूचना:

महान कवी रबीन्द्रनाथ टैगोर भारतीय साहित्य की एक धारा है। उनको “कविगुरु” के उपाधि से भी जाना जाता है। उनके बाद की बहुत कविया उन्हें “गुरुदेव” कहके पुकारते।

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म एवं परिवार :

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म हुआ था १८६१ साल , ७थ मई में कोलकाता की जोरासांको ठाकुर परिवार में। उनके पिता का नाम देबेन्द्रनाथ टैगोर और माता का नाम शारदा देवी है। 

समृद्ध परिवार में जन्म होने के नाते रबीन्द्रनाथ ठाकुर के पिताजी का सपना था की उनका बेटा बैरिस्टर बने। लेकिन बचपन से ही बंगाल के साहित्य पर उनका बहत तेज़ आकर्षण बढ़ता गया। 

रबीन्द्रनाथ टैगोर का बचपन :

बचपन में ही उन्होंने अपनी माता को खोया था और पिताजी भी दूसरे देशों में अपना व्यापार संभालने के लिए जाता था। इसीलिए घर के नौकरो के पास ही बड़ा हुआ कविगुरु रबीन्द्रनाथ। 

८ वर्ष की उम्र में वो कविता लिखने लगे। उसने अपना एक छद्म नाम रखा था – ‘भानु सिंह’। वो इसी नाम से कविता लिखते गए।  १६ वर्ष की उम्र में उनका कविता मैगज़ीन में भी आने लगा था। 

रबीन्द्रनाथ टैगोर का शिक्षा :

पिताजी उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए उनकी विदेश यात्रा पर भेज दिया। पर वहा रबीन्द्रनाथ टैगोर का मन नहीं लगा। इंग्लैंड की संस्कृति को वो पसंद नहीं करते थे। और उनको कवी के रूप में आगे भी बढ़ना था। इसलिए उन्हें वापस भारत आना पढ़ा। 

रबीन्द्रनाथ टैगोर एवं विश्व भारती :

साल १९०१ में पश्चिम बंगाल की एक ग्रामीण इलाके में विद्यालय की स्थापना की। वो विद्यालय में ही रहने लगे थे और उन्होंने भारत और पाश्चात्य परंपरा को मिलाने का प्रयास किया। १९२१ में उनके विद्यालय का नाम विश्व भारती विश्वविद्यालय रक्खा गया।

राजनीति:

रबीन्द्रनाथ ने उपनिबेशद प्रथा के विरोध किये थे। और भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन में शामिल थे। स्वदेशी आंदोलन में गांधीजी को उन्होंने बहुत सहायता की थी। 

उन्होंने भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन के हिताहित में बहुत गाने लिखे है , उसमे से सबसे ज्यादा प्रसिद्ध गाना “एकला चलो रे” सभी भारतीयों को छू गया था। 

१९१९ साल में उनको ‘नाईट’ उपाधि मिला था। इस साल जलियांवाला बाग में हजारो लोगो की हत्या हो गयी थी। इसलिए उन्होंने नाईट उपाधि त्याग कर दिया था। 

रबीन्द्रनाथ टैगोर की काव्य एवं कविताएं :

रबीन्द्रनाथ टैगोर का पहला नाटक था “वाल्मीकि प्रतिभा” . इसके अलावा उनका ‘डाकघर – १९१२’ ‘चंडालिका’ , ‘रक्तकरबी’ ‘चित्रांगदा’ और ‘श्यामा’ बहुत लोकप्रिय है। 

वो पहले कवि थे जिन्होंने संछिप्त कहानी लिखना शुरू किया (१८७७)। उनके कुछ संछिप्त कहानी बहुत प्रसिद्ध है, जैसे ‘’काबुलीवाला” , “खुदितो पाषाण” “अतिथि” . 

रबीन्द्रनाथ टैगोर ने ८ “प्रतिलिपि” और ४ “उपन्यास” लिखा है। जिनमे से ‘शेषेर कबिता’ ‘चार अध्याय’ ‘नौका डूबी’ ‘घरे बाइरे’ ‘चोखेर बाली’ बहुत जनप्रिय है। 

गीतांजलि काव्य ग्रन्थ के लिए १९१३ साल में उनको साहित्य में नोबेल पुरस्कार मिला था। गीतांजलि के अलावा और भी बहुत प्रसिद्ध कुछ काव्य ग्रन्थ है – मानसी , सोनार तोरी , बलाका।

रबीन्द्रनाथ टैगोर ने दो देशों का जातीय संगीत रचना की है : बांग्लादेश और भारत।

उपसंहार:

रबीन्द्रनाथ ठाकुर ने अपने पुरे जीवन को भारतीय लोगों के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने जिंदगी में बहुत दुख सहन किया लेकिन उनका यंत्रणा उनके हाथों से एक “कला” के रूप में निखार आया। और उनके कामो के जरिये हमारे ज़िन्दगी के हर दर्द, हर ख़ुशी, हर भाबनाओ को ब्यक्त करने में सहायता किये। 

उनका देहांत हुआ था ७थ अगस्त , १९४१ उनके ही घर में हुआ था। 

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