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Karva Chauth Ki Kahani | करवा चौथ व्रत कथा

Karwa CHAUTH VRAT KAHANI

करवा चौथ की कहानी सुनना है तो इस पोस्ट को पूरा पढ़िए और अपने चाहने वालों के साथ शेयर करिये। यहाँ आपको करवा चौथ की कहानी के साथ मे करवा चौथ की व्रत कथा भी बताया जायेगा। और साथ में इसका महत्व और इतिहास भी जान पाएंगे। चलिए पढ़ते है करवा चौथ की नियम।

दोस्तों करवा चौथ सिर्फ शादी शुदा लड़की ही नहीं, अबिबाहित शादी के उम्र हो जाने वाली लड़कियां भी रख सकती है। ये व्रत निर्जला उपवास के साथ रक्खा जाता है। शाम तक लड़कियां निर्जला रहती है और शाम के एक शुभ मुहूर्त पर चंद्र देव की पूजा करके ये व्रत खोला जाता है।

करवा चौथ की कहानी

हिन्दू धर्म में ये माना जाता है की करवा चौथ की परंपरा देवताओं की समय से चला आ रहा है। पुराण में ये कहा गया है एक बार देवताओं और असुरों में युद्ध के समय से ही ये व्रत पालन का रीती चला आ रहा है।

असुरों के साथ युद्ध से देवताओं लगभग परास्त के और बढ़ रहे थे। भयभीत होकर सभी देवता भगवन ब्रम्हा के पास गया और कहा ‘ हे भगवान, इस युद्ध में देवताओं का पराजय निश्चित है, अब आप ही इसका उपाय दर्शाएं’।

भगवन ब्रम्हा ने कहा इस कठिन संकट से बचने के लिए हर एक देवताओं की पत्नियों को अपने अपने पति के लिए व्रत रखना पड़ेगा। अगर निष्ठा से हर एक देव पत्नियां पतियों के विजय के लिए व्रत रखता है तो देवताओं की जीत निश्चित है।

ये बात कहकर ब्रम्हदेव ने वचन दिया की अगर सच्चे दिल से वो ऐसा कर पाते है तभी जित हासिल हो पायेगी। इस बात को सभी देवताओं ने स्वीकार किया। ब्रम्हदेव के वचन के अनुसार कार्तिक माह के चतुर्थी तिथि पर सभी देव पत्नियों ने निर्जला व्रत रखा और पतियों की विजय की कामना की।

सभी देव पत्नियों की ये व्रत भगवान द्वारा स्वीकार हुई और युद्ध में देवताओं ने जीत हासिल किया। तभी ये खबर पत्नियों तक पंहुचा और उन सब ने व्रत खोला। आसमान की तरफ सभी ने देखा तो उस वक़्त चाँद उतर आये थे। इसीलिए इस व्रत को अभी तक उसी समय खोला जाता है और उसी रीती रिवाजों के अनुसार पालन किया जाता है।

इस मे सिर्फ चन्द्रमा की ही नहीं उसके साथ भगवान शिव, श्री विष्णु, माता पार्वती, कार्तिकेय, और श्री गणेशा का पूजा की जाती है। सभी महिलाओ उस वक़्त व्रत कथा सुनते है।

करवा चौथ की महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार जो भी महिलाएं इस व्रत को सच्चे दिल से रखते है उसे सुख और शांति मिलती है। ये व्रत पति के लिए की जाती है जैसा की देव पत्नियों ने भी किया था। इसीलिए इस व्रत को रखने पर पतिओं को भी सुख और संपत्ति मिलता है।

ये भी कहा जाता है करवा चौथ के व्रत रखने पर सुहागिन महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ति होती है। क्यु की करवा चौथ के कथा की  महाभारत में भी उल्लेख है। भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को ये व्रत रखने के लिए बोला था। और इसी व्रत के वजे से ही पांडव वंश के पांच पांडवो ने कौरव वंश के 100 से ज्यादा योद्धाओं को पछाड़ दिया।

करवा चौथ की व्रत कथा सुनिए

2021 में करवा चौथ का समय

करवा चौथ 2021 साल मे रबिबार, 24 अक्टूबर सुबह 3:01 बजे से 25 अक्टूबर सुबह 5:43 बजे तक रहेगा। इसी के बीच मे सभी हिन्दू लड़किया अपनी अपनी पतियों के लिए ये व्रत रख सकते है ।

करवा चौथ में बीवी को कैसे खुश करें

भारत में ज्यादातर सुहागिन ये व्रत रखती है। पति अगर ऑफिस में काम करते है तो इस साल पत्नी को खुश करने के लिए आपके पास एक सुनेहरा मौका है। क्युकी इस बार करवा चौथ रबिबार को हुआ तो शायद आपके ऑफिस भी बांध रहेगा।

अगर आप आपकी बीवी के लिए कुछ गिफ्ट खरीदके लाये तो शायद वो बहुत खुश हो जाये। इसीलिए ये गिफ्ट आप एकबार देख सकते है, इसमें से किसी भी चीज़ अगर आपको सही लगता है तो आप अपनी पत्नी को ये गिफ्ट कर सकते है : करवा चौथ में बीवी को ये गिफ्ट करें

निष्कर्ष

करवा चौथ की कहानी आपको कैसा लगा बताइयेगा। और इस पेज को अपने दसौतों को भी भेजे ताकि करवा चौथ का महत्व वो भी जान पाए। धन्यवाद ।

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